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शहादत दिवस पर माले कार्यकर्ताओं ने शहीदों को किया याद


बक्सर पत्रिका :- भाकपा-माले ने डुमरांव में स्थित जिला कार्यालय पर जुटकर अपने पार्टी के दूसरे महासचिव सहित केसठ के रतन उर्फ राजेंद्र सिंह व निर्मल सिंह की शहादत को मनाया। भाकपा-माले के जिला सचिव नवीन कुमार , डुमरांव सचिव सुकर राम , चौगाई सचिव वीरेंद्र सिंह सहित दर्जन भर कार्यकर्त्ता ने शहीदों के फोटो पर पुष्पांजलि की और उनकी स्मृति में दो मिनट की मौन श्रद्धांजलि अर्पित की। विदित हो कि 29 नवंबर 1975 में आज ही के दिन भाकपा-माले के दूसरे राष्ट्रीय महासचिव काॅ सुब्रत दत्त (काॅॅ जौहर), काॅॅ डॉ निर्मल महतो और काॅ राजेंद्र यादव (काॅ रतन) भोजपुर में शहीद हुुए थे। शहादत की 47वीं बरसी पर इन सभी साथियों को आज श्रद्धांजलि दी गयी। उस कठिनतम दौर में काॅ जौहर ने हर प्रकार के हमलों को झेलते हुए चारू मजूमदार की लाइन को मजबूती से जिंदा रखा और उसी का नतीजा है कि आज देश के विभिन्न भागों में भाकपा-माले का आंदोलन तेजी से फैला। आज एक बार फिर से देश में आपातकाल की स्थिति है, ऐसे वक्त में काॅ जौहर द्वारा बताया गया रास्ता हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है। काॅॅ राजेंद्र यादव (कॉ रतन) का जन्म 1950 में बक्सर जिले के केसठ गांव के एक प्रगतिशील मध्यवर्गीय परिवार में हुआ था। केसठ को बक्सर (भोजपुर) जिले में मास्को कहा जाता था। कॉ रतन पार्टी के महासचिव काॅॅ सुब्रत दत्त के संदेशवाहक थे और तत्कालीन भोजपुर आंचलिक कमेटी के सदस्य थे। उन्होंने का सुब्रत दत्त को बचाने की कोशिश करते हुए अपने प्राण न्यौछावर किए।  कम्युनिस्ट आंदोलन के भीतर मौजूद अंतविर्रोधों से संघर्ष के दौरान गांव के मेहनतकश, उत्पीड़ित गरीब लोगों की वास्तविक मुक्ति की आकांक्षा उन्हें नक्सलबाड़ी की राह पर ले गई। जनवरी 1972 में वे किसानों को संगठित करने के काम में लगे। अपने क्रांतिकारी जीवन की छोटी सी अवधि में ही उन्होंने अपने साथियों और जनता का अगाध विश्वास, प्यार और स्नेह हासिल कर लिया था।

       शहादत दिवस पर अपनी श्रृद्धांजलि पेश करते हुए माले जिला सचिव व पार्टी राज्य स्टैंडिंग सदस्य का नवीन ने कहा कि कामरेड जौहर (सुब्रत दत्त) , कामरेड निर्मल और कामरेड रतन (राजेंद्र सिंह) को लाल सलाम!इन तीनों ने 29 नवंबर 1975 को भोजपुर के बाबुबांध गांव में अत्याचारी जमींदार-पुंजीपतियों के खिलाफ प्रतिरोध के दौरान पारा-मिलिट्री् फोर्सेज से लड़ते शहादत वरण किया।इन के संघर्ष की शानदार क्रांतिकारी विरासत ही आज के मोदी-राज और संघ ब्रिगेड की फासीवादी बुलडोजर राज के खिलाफ संघर्ष को आगे बढ़ाने की प्रेरणा है। कामरेड जौहर के नेतृत्व में कामरेड विनोद मिश्र व कामरेड स्वदेश भट्टाचार्य के साथ पुनर्निमित व पुनर्जीवित हुई पार्टी भाकपा-माले अपनी तीन सदस्यीय केंद्रीय कमिटी के माध्यम से बिहार में अपने संघर्ष को गांवों के खेत-खलिहानों तक लेकर गई और देश भर के अगुआ क्रांतिकारियों को एकजुट करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ी।आज पार्टी फासीवादी चुनौती के खिलाफ चौतरफा पहलकदमी बढ़ा रही है। पार्टी "फासीवाद हटाओ लोकतंत्र बचाओ , शहीदों के सपनों का भारत बनाओ" नारे के साथ पार्टी का 11 वां महाधिवेशन ' आजादी , बराबरी और एकजुटता ' के आह्वान के साथ पटना (बिहार) में कर रही है।

    माले के जिला सदस्य कन्हैया पासवान , डुमरांव टाउन सचिव कृष्णा राम , एक्टू नेता शंकर तिवारी , माले नेता भगवान दास , गणेश राम , इंसाफ मंच सचिव जाबिर कुरैशी , इनौस नेता रिंकू कुरैशी , विधायक पीए नासिर हुसैन , राधेश्याम शर्मा , गौरीशंकर आदि श्रृद्धांजलि सभा में उपस्थित रहे।